Duniyadaari (दुनियादारी ) हिंदी कविता by Mahadev ‘Premi “

Duniyadaari (दुनियादारी ) kundili रचना इस दिनिया के मायाजाल को देख कर बनायीं है ,कैसे मनुष्य इस मायाजाल में फंसकर अपनी साड़ी जिंदगी व्यर्थ क्र देता है और जो उसका परम उद्देश्य इस जीवन में अपने आपको पहचानने का है उसको भूल गया है.

“दुनिया दारी”

दुनिया दारी की व्यथा,कछू समझ नहिं आय,
गये जारहे जायंगे,कर कर घने उपाय,

कर कर घने उपाय,चला विन नीति न जाने,
समझा नहिं खुद कभी,लगा दुनियां समझाने ,

कपट जाल की चाल,चला दुनियां को रिझाने,
खुद को नहिं पहचान,सका वह रव पहचाने।

“प्रेमी” अव भी समय,छोड़ ये माया सारी,
खुद की तरफ देखो, न देखो दुनियां दारी।

रचियता- महादेव प्रेमी

Mahadev Prashad Premi

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी…

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी गर्ग होस्पीटल गंगापुर सिटी ,स0 मा0 (राज0)322201 मोबाईल 9667627720 संप्रति:चिकित्सा कर्मी कार्य क्षेत्र:चिकित्सा कार्य लेखन विधा-गजल,गीत,कविता और पहेली लेखन आदि प्रकाशन:(1)”बूझोबल” पहेली संग्रह प्राप्त सम्मान:कई सामाजिक व साहित्यिक सम्मान प्राप्त लेखनी उद्देश:सामाजिक विसंगतियों पर लिखना प्रेरणा पुञ्ज:स्वयम एवम अन्य लेखक रुचियां: साहित्य लेखन/अध्यापन

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