मछली हिंदी कविता-महादेव प्रेमी

“मछली”
8चरण कुण्डली।
मछली को एक वार में,भारी हुआ जुकाम,
बार बार लगि छींकने,हाय मरी रे राम,

हाय मरी रे राम,कि वगुला वैध वुलाया,
चार दिना दे दवा,परहेज भी वतलाया,

कठिन धूप सहकर,के जल से दूरी रखना,
प्राण भले ही जायं,परहेज भूल न करना,

“प्रेमी”गयी जुखाम,वाहर जल से न निकली,
दिन में तारे दिखे,कि सोचन लागी मछली।

Mahadev Prashad Premi

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी…

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी गर्ग होस्पीटल गंगापुर सिटी ,स0 मा0 (राज0)322201 मोबाईल 9667627720 संप्रति:चिकित्सा कर्मी कार्य क्षेत्र:चिकित्सा कार्य लेखन विधा-गजल,गीत,कविता और पहेली लेखन आदि प्रकाशन:(1)”बूझोबल” पहेली संग्रह प्राप्त सम्मान:कई सामाजिक व साहित्यिक सम्मान प्राप्त लेखनी उद्देश:सामाजिक विसंगतियों पर लिखना प्रेरणा पुञ्ज:स्वयम एवम अन्य लेखक रुचियां: साहित्य लेखन/अध्यापन

Comments ( 1)

Join the conversation and share your thoughts

धुनियाः ओटन लगे कपास -लेख डॉ एस जी काबरा " - Baat Apne Desh Ki

5 years ago

[…] मछली हिंदी कविता-महादेव प्रेमी Tagged dr kabra, hindi content, hindi lekh, s g kabra […]