नाजिम वाला तालाब: गंगापुर सिटी का छुपा हुआ बर्ड पैराडाइज़ | प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग

पक्षी प्रेम और पक्षी निहारने की बहुत ही सशक्त परम्परा भारतीय समाज में प्राचीनकाल से रही है

भारतीय संस्कृति में पक्षियों का बहुत महत्व है। भारतीय दर्शन में परिवार और समाज के बाद हृदय को स्पर्श करने वाला सर्वाधिक भावनात्मक संबंध प्रकृति के साथ माना गया है। सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी, पर्वत, वन वृक्ष, नदी आदि के साथ-साथ पशु और पक्षियों को भी प्रकृति का महत्वपूर्ण अंग कहा गया है।

पक्षी प्रेम और पक्षी निहारने की बहुत ही सशक्त परम्परा भारतीय समाज में प्राचीनकाल से रही है। विविध पक्षियों को देवताओं के वाहन के रूप में विशेष सम्मान दिया गया है।

विष्णु का वाहन गरुड, ब्रह्मा और सरस्वती का वाहन हंस, कामदेव का तोता, कार्तिकेय का मयूर, लक्ष्मी का वाहन उल्लू, इन्द्र व अग्नि का अरुण कुंच जिसे हम फ्लेमिंगों के नाम से जानते हैं तथा वरुण का चकवाक जिसे शैलडक कहा जाता है।

संसार में हमेशा ही दो प्रकार के विचार रखने वाले लोग मिलते हैं एक जो अपने स्वार्थ के चलते प्रकृति और पर्यावरण में अपनी महत्वाकांक्षाओं के निर्माण में असंतुलन पैदा कर रहे हैं और दूसरे जो प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण और वन जीव के संरक्षण के लिए अपना विशेष योगदान दे रहे हैं पक्षी प्रेम भी उसी प्रकृतिक से लगाव का एक हिस्सा है और अपने देश में और विदेश में लाखों ऐसे पक्षी प्रेमी है जो ऐसी जगह की तलाश करते रहते हैं जहां पर उन्हें प्रकृति और प्रकृति के इस खूबसूरत उपहार पक्षियों के नजदीक जाने का मौका मिले दुर्लभ से दुर्लभ पक्षियों को वह पहचाने उनके एक्टिविटी और जीवन चक्र के बारे में जानकारी हासिल करें उनके एक फैशन बन चुका है

मैं जिस शहर में रहता हूं उसके आसपास भरतपुर और सवाई माधोपुर में ऐसे ही वन्यजीव और पक्षियों के संरक्षण के लिए अभ्यारण स्थित हैं जो कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि मेरी ही शहर मैं एक ऐसा पक्षी विहार स्थान है जहां पर देश विदेश से हजारों की तादाद में 60 से अधिक प्रकार की विदेशी माइग्रेटरी तथा इतने ही नेटवर्क का जमावड़ा बना रहता है और खासकर सर्दियों में जब विदेशी पक्षियों के प्रवास का समय होता है उस समय तो यहां पर दुर्लभ से दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को मैंने देखा है उनके फोटोग्राफ्स लिए हैं उनके एक्टिविटी को कैमरे में कैद किया है जी मैं बात कर रहा हूं नाजिम वाला तालाब की जो सभी पक्षी प्रेमी और पर्यावरण प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है यह मेरे शहर गंगापुर सिटी के बिल्कुल पास ही जयपुर धौलपुर को जोड़ने वाली बाईपास रोड पर स्थित है इसका एरिया लगभग 20 वर्ग किलोमीटर है  जो की  आद्र भूमि लगभग पूरे वर्ष पानी का भराव प्राकृतिक वनस्पति और पेड़ों के झुंड ,पक्षियों के लिए भोजन की उपलब्धि जैसे की मछलियां और अन्य  अकशेरुकीय   जीव जंतु सुरक्षित और शांत वातावरण हमेशा पक्षियों को आकर्षित करता है और आलम यह है कि यहां से माइग्रेटरी बर्ड्स सबसे बाद में जाना चाहते हैं सर्दियों के सीजन में मैंने ५  सर्दियों की शुरुआत से ५ महीने लगातार वहां पर बर्डवाचिंग की और कम से कम 60 से अधिक प्रवासी पक्षियों के रिकॉर्ड फोटोग्राफ्स लिए हैं इनमें मुख्यतः ये पक्षी यहां आए:

सैंड पाइपर, कॉमन सैंड पाइपर, वुड सैंड पाइपर, कॉमन ग्रीन शंक, स्पॉटेड रेड शंक, ग्रीन सैंड पाइपर, लिटिल स्टिंट, टेमिनिकस स्टिंट, स्माल प्रतीन्कोल, ब्लक्क हेडेड गुल, पल्लास गुल, रिवर टर्न लिटिल रिंग प्लोवर, केंटिश प्लोवर, पीड अवोसेड, पेंटेड स्टोर्क, एशियाई स्पून बिल, ग्रेट वाइट पेलिकान्स, द्ल्मासियन पेलिक्न्स, ब्लैक विंगेड स्टिल्ट के झुण्ड अभी भी मौजूद हैं।

इसके अलावा सभी प्रकार की वेग टेल जिसमे मुख्यतया वाइट वेग टेल, येलो वेग टेल, सिट्रीन वेग टेल, वाइट ब्राउड वेग टेल के साथ

बार हेडेड गूस, नॉर्दन पिनटेल के झुंडो का प्रवास भी यहाँ पर सर्दियों में पूरे 3 महीने रहा है। ब्लैक टेल्ड गोडविट और रुफ्फबर्ड्स ; झुण्ड, पेसेरिन बड्र्स में वाइट थ्रोट, ब्लू थ्रोट स्टोन चैट, पीड बुश चैट, रोसी स्टर्लिंग; बस लार्क पायपीट आदि भी मिले हैं।

इसके अलावा इंडियन नेट वर्ड्स में कोरमोरेंट ग्रेट एंड लिटिल पर्पल हिरन ग्रे हैरान ब्लैक नेट स्टॉक पेंटेड स्टोर्क ब्लैक बिग डिस्टिल्ड red-wattled लैपविंग पलाश गुल रिटर्न आदि शामिल है


में  पेशे से ऑर्थाेपेडिक सर्जन हैं लेकिन बर्ड वॉचिंग और पक्षी विज्ञान मेरा  पेशन है। अपने पेशन के लिए में  पहले भर्डा गांवडी के तालाब पर जाते थे लेकिन उसमें अब पानी ही नहीं बचा। इस बार सर्दियों में अचानक नाजिमवाले तालाब पर जाना हुआ और वहां उन्हें वह खजाना मिल गया जिसकी उन्हें सालों से तलाश थी। कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जिस नाजिमवाला तालाब की आम शोहरत शहर के गंदे पानी के अंतिम स्टोरेज के रूप में थी वहां स्वच्छ निर्मल पानी में सैंकड़ों की संख्या में विदेशी मेहमान हजारों किलोमीटर दूर से अपना आशियाना छोड़कर सर्दी में यहां ब्रीडिंग के लिए आए होंगे।

समय अप्रैल का जो की  प्रवासी लौटने की तैयारी में है लेकिन अब भी कम से कम 15 प्रकार के प्रवासी अब भी यहीं जमे हैं।
प्रकृति प्रेमी और पक्षी प्रेमी बहुत ही आराम से शांत वातावरण में पाल के किनारे पर बैठकर सिर्फ पक्षियोंसिर्फ पक्षियों को निहारने ही नहीं उनकी हर एक गतिविधि को नजदीकी से वॉच कर वह चाहे पेलिकंस के झुंड का अपने मछली पकड़ने के नायाब अंदाज

पाइड किंगफिशर का एक कुशल गोताखोर की तरह डाइव करने का अंदाज विवर्तन का एक कुशल मछली खोर की तरह सेकंड के कुछ हिस्से में अपने शिकार को पकड़कर और तुरंत अपने सुरक्षित स्थान पर जाने का व्यवहार कोरमोरेंट का मछली पकड़कर उछाल कर टॉस करने का तरीका किंगफिशर का अपने शिकार को पकड़ने का तरीका या पाल के पास ही स्थित पेड़ों पर बैठे स्पॉटेड ऑमलेट केयर की रोमांटिक गतिविधि या ब्लैकपिंक डिस्ट्रिक्ट की मीटिंग एक्टिविटी यह कुछ उन हजारों गतिविधियों में से मैं वर्णन कर रहा हूं जो आप नाजिम वाले तालाब पर बेफिक्री और सुकून से
यह जन्नत बनी रहे इस के लिए कुछ प्रयास हम सभी मिलकर करे

1. तालाब एरिया मे किसी भी प्रकार के पेड़ो की कटाई नहीं हो। जंगली कांटेदार पेड़ ही इन पंछियों के जीवन, सुरक्षा, भोजन व ब्रीडिंग के लिये आवश्यक हैं। कुदरती अवस्था में ही पौधों का विकास होने दिया जाए।

2. तालाब तक पहुंचने वाले जल में जो भी अवरोध हैं उन्हें तुरंत हटाया जाए।

3. पर्यटकों को बैठने की व्यवस्था इतनी दूर हो की वहां से पंछियों को किसी प्रकार का खतरा ना हो।

4. मछली पकड़ना व किसी भी तरह के शिकार पर तालाब एरिया में तुरंत रोक लगाई जाए।

5. तालाब एरिया में इंसानी गतिविधि कम से कम हों ताकि कुदरत अपना काम तो पूर्ण ईमानदारी से करती रहे। हमें इस एरिया को वेटलैंड कंजर्वेशन एरिया घोषित करने के प्रयास होने चाहिए यह देना है क्योंकि पक्षों को सुरक्षित आवास भोजन पानी की व्यवस्था जरूरी है तभी यहां पर विदेशों से आए पक्षियों की तादाद बढ़ेगी और यह स्थान पर्यावरण प्रेमी और पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और यह एक विश्व प्रसिद्ध पक्षी अभ्यारण का केंद्र विकसित हो सकता है अगर इस एरिया को वेटलैंड कंजर्वेशन एरिया घोषित करके और यहां पर किसी भी प्रकार की कमर्शियल एक्टिविटी जैसे कि इरीगेशन फार्मिंग फिशिंग इत्यादि बंद हो अवैध अतिक्रमण बंद हो और जो पानी का भराव यहां पर है उसमें किसी प्रकार का कोई अवरोध नहीं हो इसमें संबंधित विभाग इसमें वन विभाग इरिगेशन विभाग नगर परिषद और पर्यावरण संरक्षण विभाग को सक्रिय भाग लेकर कार्य करना होगा माननीय कलेक्टर साहब का वहां पिछले दिनों निरीक्षण हुआ था और उन्होंने भी इस स्थान को एक अच्छे पक्षी विहार केंद्र के रूप में विकसित करने की मंशा जताई और संबंधित विभाग को निर्देश भी दिए जरूरत है तो एक स्पष्ट मास्टर प्लान प्रोजेक्ट बनाकर भेजने की जिससे कि सबसे पहले इस स्थान को वेटलैंड कंजर्वेशन एरिया किया जाए
सिर्फ पक्षियों के लिए ही नहीं नाजिम वाला तालाब की खूबसूरती जो कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बरबस ही प्रकृति प्रेमियों का मन मोह लेती है देखने लायक बनता है यहां पर सुबह और शाम बैठकर गुजारे हुए कुछ पल आपको जीवन स्मृति में यादगार क्षण देकर जाएंगे आप सभी प्रकृति प्रेमी पक्षी प्रेमियों से अनुरोध है कि एक बार अवश्य आप इस जगह को विजिट करें और प्रकृति के दिए हुए इस अनुपम उपहार को अपने जीवन में अंगीकार करें

FAQ

Q1. नाजिम वाला तालाब कहाँ स्थित है?
उत्तर: यह गंगापुर सिटी (राजस्थान) के पास जयपुर-धौलपुर बाईपास रोड पर स्थित है।

Q2. यहां कौन-कौन से पक्षी देखने को मिलते हैं?
उत्तर: पेलिकन, स्टोर्क, सैंडपाइपर, पिनटेल, गूस, वेगटेल सहित 60+ प्रवासी पक्षी।

Q3. बर्ड वॉचिंग का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: सर्दियों का मौसम (नवंबर से फरवरी) जब प्रवासी पक्षी यहां आते हैं।

Q4. इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए क्या किया जाना चाहिए?
उत्तर: इसे वेटलैंड कंजर्वेशन एरिया घोषित करना, अवैध शिकार रोकना और मानव हस्तक्षेप कम करना।

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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