पावरलेस बर्थडे के फूल : राजनीति, होर्डिंग्स और भीड़तंत्र पर तीखा हास्य-व्यंग्य

यूं तो साल के बारह महीने का हर दिन एक न एक दिन किसी ने किसी तरह का तीज त्योहार तिथि मिती का डे होता है ।लेकिन इन सब ,डे ,में बर्थडे के मायने किस्म किस्म के हैं ।इसे मनाने के लिए तरह-तरह के जतन, तरह-तरह के शिगुफे, तरह तरह के नाटक नौटंकी तरह-तरह के फंक्शन तो मनते ही है ,लेकिन बर्थडे कितना वजनदार मना उस वजन से भी बर्थडे को तौला जाता है ।
बर्थडे मनाने के तौर तरीकों से अनेक चर्चा में आना चाहते हैं तो किसी का बर्थडे चर्चा का विषय बन जाता है ।
एक नेताजी का बर्थडे मना कर घर आए पंडित शिवनारायण जी बोले बर्थडे मने तो ऐसा मने जैसे कांति दादा का ! अरे बर्थडे पर कांति दादा का गला हार से भर गया ,पूरा कमरा फूलों से और केमरा फोटो से भर गया। पिछले साल जब दादा सत्ता के पावर में थे तब लोग मन से हार फूल, उपहार, मिठाई के डिब्बे लेकर आए थे इस बर्थडे पर वे पावरलेस थे इस कारण उनके पहले से जागृत हुए सिपहासालारों ने गांव के गेंदे, गुलाब के बगीचे वाले को बोल दिया था कि इस बार बगीचा कांति दादा के नाम कर देना! बगीचे वाला समझ नहीं पाया तो सिपाहासालार की गैंग नहीं साॅरी समूह ने उन्हें समझाया कि इस बार आपके फूल मुरझा गए हैं और हमारे कांति दादा के लिए फूल खिल गए हैं। बगीचे वाला आखिर क्या करता जब कांति दादा पावर में थे तब उद्यानिकी वाले से फूलों का उद्यम सब्सिडी के साथ दादा ने दिलाया था। बगीचे वाले ने फूलों के बगीचे को कांति दादा के गले में डालने की हां करने के बाद दादा के सिपाहासालारों से पूछा कि उनका जन्म तो ,छट, को हुआ था और आप तो 11 तारीख बता रहे हैं ।इस पर सिपाही सालार में से गुलामी में अभ्यस्त कनेश जी बोले तुमको छठ, सातम से क्या लेना देना उससे क्या मतलब ? जमाना डिजिटल और हाईटेक है। तारीख ध्यान रखो और तारीख आने तक एक भी फूल बाहर नहीं जाना चाहिए ।
पंडित जी बोले कांति दादा को जब से पार्टी ने ,बे टिकट, किया तब से वे अपने गिरते और गर्दिश भरे दिनों को फिर से जिंदा करने के लिए कोई जतन ढूंढ रहे थे कि भूरालाल ने बर्थडे मनाने का रास्ता दिखा कर कांति दादा के काल कवलित राजनीतिक जीवन में प्राण फूंकने का रास्ता और उपक्रम बता दिया ।
पंडित जी बोले कांति दादा के टुकड़ों पर पलने वाले कुछ बेसहारा अनुयायियों ने हाईटेक युग की चाल को समझ कर अपने कदम एक-एक कर क्रिएशन वाले के प्रतिष्ठान की ओर बढ़ा दिए और उससे बोले कि दादा का जन्मदिन 11 तारीख को आ रहा है लोगों ने समझ लिया कि दादा क्षेत्र से नौ दो ग्यारह हो गए हैं। लेकिन उनका बर्थडे एक पर एक ग्यारह बनकर फिर ताकत से दादा उतर रहे है ।इसलिए गांधी चौक से लेकर भी विवेकानंद स्टैचू तक ,रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड तक, सराफा से लेकर शराब के ठेके तक दादा के होर्डिंग्स लगने चाहिए। नगर का कोई भी बिजली का खंभा, टेलीफोन का खंभा खाली नहीं रहना चाहिए। सबके ऊपर दादा के होर्डिंग्स लटकना चाहिए और तुम तो जानते हो दादा इस बार फिर माननीय बनने वाले हैं। तुम्हारे होर्डिंग ,बैनर की राशि किसी गरीब गुरबे के आधार कार्ड से मदद करने की तरकीब से चुका दी जाएगी ।इस बीच क्रिएशन वाले को दादा का डिस्क्रिप्शन दिमाग याद आया कि पिछले चार-पांच साल में हर शेष बिल दादा ने माननीय राशि से चुका दिए थे ।मुझे भी बैनर होर्डिंग का पंगा न लेकर दादा को खंभों पर टांग देना है ।राशि वसूली का रास्ता हम जैसे लोगों को पता है ही ।
बर्थडे मनने के मायने की चर्चा के बीच सुनील भैया आ टपके और बोले बर्थडे पर मरीजों को बिस्किट फल ,भूखे को भोजन, नंगों को कपड़े तो दादा सालों से बांटते आए हैं लेकिन पार्टी ने उन्हें ,बे टिकट, क्या किया उनके राजनीतिक रूप से कपड़े उतर गए ।इन्हीं सलवटे पड़े कपड़ों को कलफ लगाकर पहनने के लिए थे बर्थडे मनाया जा रहा है। वे आगे बोले दादा ने जब भी चलती थी तब वह आइटम गर्ल लाकर और फिल्मी ,सीरियल वालों को बुलाकर खूब ठुमके लगाए। इन ठुमकों ने दादा की ठसक निकाल दी लेकिन वे अब समझ गए हैं कि बर्थडे पर तरह-तरह के, अलग-अलग किस्म के आयोजन से भीड़ इकट्ठा होती है ।और लोकतंत्र में भीड़ यानी माथे गिनने और संख्या का गणित ही मायने रखता है। लोकतंत्र की राजनीति बर्थ डे को ,भीड़ डे ,में तब्दील करने का जिसने ककहरा सीख लिया वह भीड़ के बलबूते पर सत्ता का सेहरा बांध सकता है। इसी कारण हर छोटा बड़ा नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, सार्वजनिक नुमाइंदा , व्यापारी ,अधिकारी लोग किस्म किस्म का बर्थडे मनाने के लिए जतन करते हैं। कई तो तिथि पर,कई तारीख पर बर्थडे का केक काटकर लोकतंत्र की ,केट, को सेट कर लेते हैं और इसी लोकतंत्र के रेट को पिंजरे में कैद कर केक के जरिए राजनीति में किक मारते है !

Prem Chand Dwitiya

Prem Chand Dwitiya

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म…

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म प्र है

Comments ( 0)

Join the conversation and share your thoughts

No comments yet

Be the first to share your thoughts!