Mahadev Prashad Premi
Jul 25, 2021
हिंदी कविता
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मनुष्य जीवन की उन्नति संगति से ही होती है। संगति से उसका स्वभाव परिवर्तित हो जाता है। संगति ही उसे नया जन्म देता है। जैसे, कचरे में चल रही चींटी यदि गुलाब के फूल तक पहुंच जाए तो वह देवताओं के मुकुट तक भी पहुंच जाती है। ऐसे ही महापुरुषों के संग से नीच व्यक्ति […]
Mahadev Prashad Premi
Jul 25, 2021
हिंदी कविता
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चिंता की एक बहुत ही उपयुक्चित व्याख्या विकिपीडिया से ली गयी है “एक भविष्य उन्मुख मनोदशा है, जिसमें एक व्यक्ति आगामी नकारात्मक घटनाओं का सामना करने का प्रयास करने के लिये इच्छुक या तैयार होता है जो कि यह सुझाव देता है कि भविष्य बनाम उपस्थित खतरों के बीच एक अंतर है जो भय और चिन्ता […]
Mahadev Prashad Premi
Jul 24, 2021
Poems
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‘ जुवान को समेट कर रखें ‘ जुवान पर लगाम औरफलों में आम,ये श्रेष्ठ माने जाते है, किसी ने क्या खूव कहा है,लम्वा धागा और लम्वी जुवान,हमेशा उलझ जाती है, इसलिये धागे को लपेट कर,और जुवान को समेट कर रखें ।
Mahadev Prashad Premi
Jul 24, 2021
Poems
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‘उठाना नहीं‘ जिन्दगी का एक सीधा सा गणित याद रखो, जहाँ कदर नहीं,वहां जाना नहीं, जो पचता नहीं,उसे खाना नहीं, और जो सच वोलने पर रूठ जांय,उसे मनाना नहीं, और जो नजरों से गिर जाय,उसे उठाना नहीं ।
Mahadev Prashad Premi
Jul 24, 2021
Poems
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कोई खुशियों की चाह में रोया,कोई दु:खों की परवाह में रोया,अजीव सिलसिला है इस जिंदगी का,कोई भरोसे के लिए रोया,कोई भरोसा करके रोया,कभी कोई जिन्दगी से नाराज ना होना,क्या पता आप जैसी जिन्दगी,किसी और का सपना बन जाय
Mahadev Prashad Premi
Jul 14, 2021
Poems
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कर्म गठरिया लाद कर,जग फिर है इन्सान,जैसा कर वैसा भरे,विधि का यही विधान,विधि का यही विधान,कर्म से सव कुछ आवै,दुख से बदले सुख,सभीविपदा टल जावै,कर्म करे किस्मत वने,जीवन का यह मर्म,“प्रेमी”तेरे भाग्य में,तेरा अपना कर्म।
Mahadev Prashad Premi
Jul 12, 2021
Poems
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“कुण्डली”6चरण।“अखवार”अखवार प्रात ही घरपर,ले आता समचार,हिंसा चोरी लूट हो,होवे अत्याचार।होवे अत्याचार,सुसाइड वलत्कार हो।खूव फजीती होय,जो नेता भृष्टखोर हो,राजनीति की चाल,से काम करे सरकार,देश विदेशी खवर,सव छाप रहे अखवार।
Mahadev Prashad Premi
Jul 12, 2021
Poems
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वर्षा के दिन आ गये , भरे तलैया ताल खेती की आशा बनी,कृषक हुए खुशहाल न्रत्य करत है मोर पपहिये ने टेर लगाई “प्रेमी” खुश है आज, किसानो का मन हर्षा वन्धी आशा चहु और की आई सुन्दर वर्षा
Vyagra Pandey
Dec 25, 2020
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नव वर्ष मंगलमय -हिंदी कविता नव बर्ष विशेस कवी सम्राट व्यग्र पाण्डेय द्वारा रचित
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 14, 2020
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*समस्त पिता एवं पुत्रो को समर्पितएक रचना अज्ञात श्रोत से मिली है. आप सभी को पसंद आएगी. ऐसे ही विचार लेख कविता आदि के लिए जुड़े रहिये बात अपने देश की से