‘उठाना नहीं’ Hindi Kavita Poem अतुकांत कविता-Mahadev Premi
‘उठाना नहीं‘ जिन्दगी का एक सीधा सा गणित याद रखो, जहाँ कदर नहीं,वहां जाना नहीं, जो पचता नहीं,उसे खाना नहीं, और जो सच वोलने पर रूठ जांय,उसे मनाना नहीं, और जो नजरों से गिर जाय,उसे उठाना नहीं ।
‘उठाना नहीं‘ जिन्दगी का एक सीधा सा गणित याद रखो, जहाँ कदर नहीं,वहां जाना नहीं, जो पचता नहीं,उसे खाना नहीं, और जो सच वोलने पर रूठ जांय,उसे मनाना नहीं, और जो नजरों से गिर जाय,उसे उठाना नहीं ।
कोई खुशियों की चाह में रोया,कोई दु:खों की परवाह में रोया,अजीव सिलसिला है इस जिंदगी का,कोई भरोसे के लिए रोया,कोई भरोसा करके रोया,कभी कोई जिन्दगी से नाराज ना होना,क्या पता आप जैसी जिन्दगी,किसी और का सपना बन जाय
कर्म गठरिया लाद कर,जग फिर है इन्सान,जैसा कर वैसा भरे,विधि का यही विधान,विधि का यही विधान,कर्म से सव कुछ आवै,दुख से बदले सुख,सभीविपदा टल जावै,कर्म करे किस्मत वने,जीवन का यह मर्म,“प्रेमी”तेरे भाग्य में,तेरा अपना कर्म।
“कुण्डली”6चरण।“अखवार”अखवार प्रात ही घरपर,ले आता समचार,हिंसा चोरी लूट हो,होवे अत्याचार।होवे अत्याचार,सुसाइड वलत्कार हो।खूव फजीती होय,जो नेता भृष्टखोर हो,राजनीति की चाल,से काम करे सरकार,देश विदेशी खवर,सव छाप रहे अखवार।
वर्षा के दिन आ गये , भरे तलैया ताल खेती की आशा बनी,कृषक हुए खुशहाल न्रत्य करत है मोर पपहिये ने टेर लगाई “प्रेमी” खुश है आज, किसानो का मन हर्षा वन्धी आशा चहु और की आई सुन्दर वर्षा
नव वर्ष मंगलमय -हिंदी कविता नव बर्ष विशेस कवी सम्राट व्यग्र पाण्डेय द्वारा रचित
*समस्त पिता एवं पुत्रो को समर्पितएक रचना अज्ञात श्रोत से मिली है. आप सभी को पसंद आएगी. ऐसे ही विचार लेख कविता आदि के लिए जुड़े रहिये बात अपने देश की से
दिवाली का त्यौहार खुशियों का उमंग का हर्ष का रोशनी का त्यौहार है. महादेव प्रेमी द्वारा रचित कुंडली विधा पर आधारित ये कविता आपको इस त्यौहार के महत्त्व को याद दिलाएगी. ऐसे ही कविता लेख आदि के लिए जुड़े रहे बात अपने देश की से
रसगुल्ला हिंदी कविता मिठाइयो का बंगाली सरताज रसगुल्ला के ऊपर लिखी एक हंसाती गुदगुदाती कविता है ,पाठको को जरूर पसंद आएगी
प्रस्तुत है मछरदानी के महत्व पर हंसाती गुदगुदाती एक कविता महादेव प्रेमी द्वारा रचित