दिवाली की सफाई-हास्य व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 25, 2026 व्यंग रचनाएं 0

दिवाली की सफाई में घर का पुराना सामान ही नहीं, आदमी के पुराने शौक भी कटघरे में खड़े हो जाते हैं। कैमरे कबाड़ घोषित हो चुके हैं और किताबें अगली दिवाली तक अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। पत्नी की सफाई और लेखक की साहित्यिक महत्वाकांक्षाओं के बीच फँसा एक चुटीला आत्मव्यंग्य—**‘दिवाली की सफाई’।**

मुझे ऑनलाइन रिश्ते क्यों पसंद हैं? | डिजिटल दोस्ती पर आत्मव्यंग्य — डॉ. मुकेश असीमित

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 28, 2026 व्यंग रचनाएं 0

ऑनलाइन रिश्तों में बधाई देना, न्यौता भेजना और अपनापन जताना कितना आसान हो गया है! लेकिन जब कोई मित्र सचमुच दरवाज़े पर आ जाए, तो क्या होता है? डिजिटल दोस्ती की सुविधाओं पर एक चुटीला आत्मव्यंग्य।

ठोस, द्रव और गैस—तीनों में महंगाई! | आम आदमी पर महंगाई का व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Sep 13, 2026 व्यंग रचनाएं 0

महंगाई अब केवल बाजार के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रही। शक्कर और प्याज जैसी ठोस वस्तुओं से लेकर तेल-पेट्रोल जैसे द्रव पदार्थों और घरेलू गैस तक—उसने पदार्थ की तीनों अवस्थाओं में आम आदमी को जकड़ लिया है। पढ़िए डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का हास्य-व्यंग्य।

मौसम और डिजिटल दरबार: भविष्यवाणियों पर तीखा व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Sep 4, 2026 व्यंग रचनाएं 0

सोशल मीडिया के डिजिटल दरबारों ने घाघ-भड्डरी की लोक-कहावतों से लेकर मौसम विभाग तक सबको पीछे छोड़ दिया है। पढ़िए मौसम की ऑनलाइन भविष्यवाणियों और किसानों की उलझनों पर डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का चुटीला व्यंग्य।

शर्त की सौगंध: ऊपरी कमाई और भ्रष्ट बाबुओं पर तीखा व्यंग्य

Ram Kumar Joshi Aug 25, 2026 व्यंग रचनाएं 0

कलेक्ट्रेट के दो बाबू ऊपरी कमाई से एक तोला सोना खरीदने की शर्त लगाते हैं। मगर जब बेईमानी की प्रतियोगिता में भी बेईमानी होने लगती है, तो रिश्वतखोरी का पूरा खेल सार्वजनिक हो जाता है। डा. राम कुमार जोशी की यह व्यंग्य रचना सरकारी दफ्तरों, भ्रष्टाचार, अनुकंपा नियुक्ति और व्यवस्था की विडंबनाओं पर तीखा प्रहार करती है।

रैपिडो युग: अब आदमी से पहले उसकी लोकेशन पहुँच जाती है

Anushka Garg Aug 21, 2026 News and Events 0

रैपिडो बुक करते ही आदमी बाद में मिलता है, लेकिन उसका नाम, बाइक नंबर, रेटिंग और लोकेशन पहले पहुँच जाती है। डिजिटल मैप, लाइव लोकेशन और बाइक टैक्सी के इस दौर पर पढ़िए एक चुटीला हास्य-व्यंग्य।

मर्दानी -बड़े साहब के बाद बीबी जी और भी बड़ी निकलीं!

Ram Kumar Joshi Jul 28, 2026 व्यंग रचनाएं 0

रिश्वत कांड में बड़े साहब की मृत्यु के बाद मुआवजे, सरकारी बंगले और अनुकम्पा नियुक्ति के लिए हुए समझौते पर आधारित तीखा हिंदी व्यंग्य।

रोने वाले रोना चाहें, पर रो न पाएं!—क्राइंग क्लब और आंसुओं की कला पर व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Jul 28, 2026 व्यंग रचनाएं 0

लाफिंग क्लब के बाद अब क्राइंग क्लब! आधुनिक जीवन, अकेलेपन, आंसुओं और रोने की कला पर डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का रोचक हास्य-व्यंग्य।

ज़ेन ज़ी की किरांति सफल हुई

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 27, 2026 व्यंग रचनाएं 0

पेपर लीक के विरोध से शुरू हुई ज़ेन ज़ी की किरांति एक इस्तीफ़े के बाद होटल की पार्टी तक पहुँच गई। मगर क्या मंत्री का त्यागपत्र मिलते ही व्यवस्था सुधर गई, भ्रष्टाचार समाप्त हो गया और विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हो गया? नई पीढ़ी की आंदोलन-शैली, रील, वाइब, वाटर कैनन और रिज़ाइन-पार्टी पर चुटीला व्यंग्य।

ज्ञान बाँटने वालों के तरकश में किस्म-किस्म के तीर!

Prem Chand Dwitiya Jul 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बड़े बाबू से लेकर सोशल मीडिया के स्वयंभू विशेषज्ञों तक—यह व्यंग्य उन ‘ज्ञानचंदों’ पर करारा कटाक्ष है, जो बिना माँगे हर मौके पर राय, नुस्खे और सलाह बाँटते हैं।