ज्ञान बाँटने वालों के तरकश में किस्म-किस्म के तीर!
बड़े बाबू से लेकर सोशल मीडिया के स्वयंभू विशेषज्ञों तक—यह व्यंग्य उन ‘ज्ञानचंदों’ पर करारा कटाक्ष है, जो बिना माँगे हर मौके पर राय, नुस्खे और सलाह बाँटते हैं।
बड़े बाबू से लेकर सोशल मीडिया के स्वयंभू विशेषज्ञों तक—यह व्यंग्य उन ‘ज्ञानचंदों’ पर करारा कटाक्ष है, जो बिना माँगे हर मौके पर राय, नुस्खे और सलाह बाँटते हैं।
भागती जिंदगी, रिश्तों की भीड़ और उपलब्धियों के बीच मन क्यों सूना रह जाता है? पढ़िए और सुनिए कबीर-भाव से प्रेरित लोक–सूफ़ी भजन “बालम, आवो हमारे गेह रे” की आत्मिक यात्रा।
जब जीवन का धर्मयुद्ध मोबाइल स्क्रीन पर लड़ा जाने लगे और रिश्तों की पहचान लाइक-कमेंट से होने लगे, तब आधुनिक पार्थ को जगाने के लिए केशव भी नया डिजिटल ज्ञान देते हैं। पढ़िए सोशल मीडिया की आदतों पर तीखा और मनोरंजक व्यंग्य।
“तन माटी रो पुतला” डॉ. मुकेश असीमित की कबीर भजन श्रृंखला की चौथी रचना है। यह निर्गुण भजन देह-अभिमान, माया, धन और जीवन की क्षणभंगुरता पर कबीर-वाणी जैसे सहज लोक-सत्य को सूफ़ियाना-फोक संगीत शैली में प्रस्तुत करता है।
क्यूआर कोड ने दुकानों, सब्जी मंडियों, टिकटों और भीख मांगने तक के तरीकों को बदल दिया है। लेकिन जब बाबू चाचा ने बेटे की शादी में लिफाफों की जगह उपहार काउंटर पर क्यूआर कोड लटका दिया, तब डिजिटल भुगतान ने विवाह की परंपराओं में भी शानदार प्रवेश कर लिया। आधुनिक तकनीक और सामाजिक व्यवहार पर रोचक हास्य-व्यंग्य।
प्रदेश के रिश्वतखोर अधिकारियों को एक अत्यंत गोपनीय ई-मेल मिलता है। उसमें चेतावनी दी गई है कि फिलहाल सरकार, एसीबी और ग्रह-नक्षत्र—तीनों प्रतिकूल चल रहे हैं। इसलिए कुछ समय रिश्वत से विश्राम लेकर भजन-कीर्तन में मन लगाना ही सुरक्षित है। अफसरशाही, भ्रष्टाचार और सत्ता के बदलते चरित्र पर तीखा व्यंग्य।
शब्दों में व्यंग्य, सुरों में संवेदना और रचनाओं में अपने समय की धड़कन—‘Dr. Mukesh Aseemit Creations’ साहित्य, मौलिक संगीत, कविता, भक्ति और सामाजिक चिंतन का एक रचनात्मक YouTube मंच है।
सड़क चौड़ी करने की सरकारी मुहिम में एक टीन की छोटी दुकान उजड़ जाती है। उसके साथ बिखर जाते हैं एक विधवा माँ के सपने, दो पढ़े-लिखे बेरोज़गार बेटों की उम्मीदें और वर्षों की मेहनत। यह व्यंग्य विकास के नाम पर होने वाले मानवीय विस्थापन की संवेदनशील पड़ताल है।
बजट आया, बसंत आया, सत्ता ने इसे बहार कहा, विपक्ष ने पतझड़ और आम आदमी ने अपनी खाली थाली देखी। इसी बीच राष्ट्रपति भवन में दिवंगत कवियों का काल्पनिक महासम्मेलन सजता है, जहाँ हर कवि अपने अंदाज़ में बजट का हिसाब पूछता है।
ईरान युद्ध के बाद चीन, रूस और ईरान का बढ़ता रणनीतिक सहयोग केवल पश्चिम एशिया का समीकरण नहीं बदल रहा, बल्कि अमेरिकी प्रभुत्व से अलग एक बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था के निर्माण को भी गति दे रहा है।